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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 34, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

असन्नभ्युदितो मूकः पवनैः स्फुरितः क्षणम् । कालेनाल्पेन विलयी देहो नाहमचेतनः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

देह भी मैं नहीं हूँ, ऐसा कहते हैं। वस्तुतः असत्‌ होता हुआ भी उदित, जड़ होने के कारण ही बोलने में असमर्थ, प्राणवायुओं द्वारा केवल अपने संचार के समय में ही संचालित, थोड़े समय में नष्ट होनेवाला यह अचेतन शरीर भी मैं नहीं हूँ