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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 34, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

अनेनैतत्पदार्थानां वस्तुत्वं प्रतिपाद्यते । शुक्लादिगुणवत्त्वं स्वं प्रदीपेनेव वाससाम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

सब पदार्थो की स्फूर्ति के समान सत्ता भी इसके अधीन ही है, ऐसा कहते है । जैसे वस्त्रं का अपना शुक्लादिगुणत्व दीपक से प्रतिपादित होता है वैसे ही पदार्थो की यह अपनी सत्ता इसी से प्रतिपादित होती है