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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verses 41–42

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 34, verses 41–42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

एकोऽसावनुभूत्यात्मा स्वानुभूतिवशात्स्वयम् । सर्वदृग्द्रष्टृदृश्यत्वात्सहस्रकरलोचनः ॥ ४१ ॥ एषोऽसावहमाकाशे सूर्यदेहेन चारुणा । विहरामीतरेणापि वायुदेहेन वायुना ॥ ४२ ॥

हिन्दी अर्थ

अनुभूति स्वरूप एक यह अपना अनुभूतिवश स्वयं सर्वद्रष्टा, सर्वद्रश्य ओर सर्वदर्शन एवं हजारों लोचन और हाथवाला है