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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 51

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 34, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

मयि स्फारे चिदादर्शे प्रतिबिम्बं यदागतम् । तदस्ति नेतरद्यस्मान्मत्तोऽन्यन्नेह विद्यते ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

मुझ विशाल चिद्रूपी दर्पण में जो प्रतिबिम्ब प्राप्त हुआ है, वह मुझसे पृथक्‌ नहीं है, क्योंकि इस संसार में मुझसे अतिरिक्त कोई वस्तु है ही नहीं