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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 93

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 34, verse 93 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 93

संस्कृत श्लोक

तथा समस्तसंसारबृहद्दृश्यदशाश्रियम् । कालत्रयस्थाममला चिच्चेतति तदात्मिका ॥ ९३ ॥

हिन्दी अर्थ

दिशा और काल के भेद से उत्पन्न वैषम्य भी उसमें नहीं है, ऐसा कहते हैं। जैसे सूर्य की प्रभा सब दिशाओं के मध्य में स्थित तीनों कालों में चेष्टा से युक्त प्रचुर पदार्थराशि को एक क्षण में प्रकाशित करती है वैसे ही यह निर्मल चिति सारे संसार की विशाल दृश्य शोभा को, जो तीनों कालों में स्थित है, एक क्षण में प्रथित कर देती है