Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 35, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
विचारणापरिज्ञात एतस्मिन्परमेश्वरे ।
अभ्युदेति परानन्दो लब्धे प्रियजने यथा ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे प्रिय बन्धुजन के प्राप्त होने पर परम आनन्द होता हे वैसे ही विचार के द्वारा इस परमेश्वर के ज्ञात
होने पर परमानन्द होता है