Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 35, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
चेतनाकलनारूपी सबाह्याभ्यन्तराश्रितः ।
जगत्पदार्थसंभारे सत्तासामान्यमास्थितः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
चेतना (पूर्वकाल और उत्तरकाल का अनुसन्धान) ओर कलना (वर्तमान
दर्शन) रूपी, बाह्य और आभ्यन्तर चेतनोपाधियों में स्थित यह जगत् पदार्थो के संभार में तो अधिष्ठान
सत्ता सामान्य स्वभाव को प्राप्त हुआ हे