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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verses 24–25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 35, verses 24–25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 24,25

संस्कृत श्लोक

एष शून्यत्वमाकाशे स्पन्द एष सदागतौ । प्रकाशश्चैव तेजस्तु पयस्स्वेष रसः परः ॥ २४ ॥ काठिन्यमवनावेवमौष्ण्यमेव हुताशने । शैत्यमेष निशानाथे सत्ता चैष जगद्गणे ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

आकाश में यह शून्यता है, वायु में यह स्पन्दन है, तेज में यह प्रकाश है, जल में यह मधुर रस है, पृथिवी मँ काटिन्य है, अग्नि में यह उष्णता है, चन्द्रमा में यह शीतलता है ओर सब जगतां में यह सत्ता हे