Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 35, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अहमेवास्मि मे नास्ति कलनापि किलेतरा ।
रेणुनेवाणुना व्योम्नि पद्मपत्रमिवाम्भसा ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अत्यन्त सूक्ष्म रेणु
से आकाश का सम्बन्ध नहीं होता, जैसे जल से कमल दल का सम्बन्ध नहीं होता और जैसे पाषाण का
भय, कम्प आदि से सम्बन्ध नहीं होता वैसे ही मेरा अन्यो से सम्बन्ध नहीं है