Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verses 38–39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 35, verses 38–39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
दुष्टात्मा मौर्ख्यमस्तीह न किंचित्केवले क्षतिः ।
न मे भोगस्थितौ वाञ्छा न च भोगविवर्जने ॥ ३८ ॥
यदायाति तदायातु यत्प्रयाति प्रयातु तत् ।
सुखेषु मम नापेक्षा नोपेक्षा दुःखवृत्तिषु ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
न मेरी भोग भोगने की अकांक्षा है और न भोगों के त्याग में मेरी वांछा है जो आता है वह
आये ओर जो जाता हे वो जाये