Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 35, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
सुखदुःखान्युपायान्तु यान्तु वाप्यहमेषु कः ।
वासना विविधा देहे त्वस्तं चोदयमेव वा ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
सुखो की मुझे अपेक्षा नहीं हे ओर दुःखो में मेरी उपेक्षा नहीं है।
सुख-दुःख चाहे आये अथवा जाये मैं इनमें मोन हूँ ३९॥ विविध वासनाएँ मेरे शरीर मेँ चाहे अस्त को
प्राप्त हों चाहे उदित हों, न इस वासनाओं में मैं हूँ और न ये मेरी कोई है