Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 35, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
इदानीं संपरिज्ञाय मयैष परिमोषितः ।
अहंकारपिशाचोऽयं शरीरतरुकोटरात् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस समय परम ज्ञानरूपी मन्त्र से इस अहंकाररूपी पिशाच को शरीररूपी वृक्ष के खोखले
से मैंने निकाल दिया है