Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 35, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
परावबोधमन्त्रेण मयेदानीमपाकृतः ।
निरहंकारयक्षोऽयं मच्छरीरमहाद्रुमः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकाररूपी यक्ष से विहीन यह मेरा शरीररूपी महान वृक्ष अत्यन्त
पवित्रता को प्राप्त होकर प्रफुल्लित वृक्ष के समान सुशोभित हो रहा है