Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 36, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
देवायमद्य लब्धोऽसि दृष्टोऽस्यधिगतोऽसि च ।
संप्राप्तोऽसि गृहीतोऽसि नमस्तेस्तु न मुह्यसि ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे देव, आज यह तुम मुझे मिल गये हो, मैने तुम्हें देख लिया है और मुझे तुम्हारा स्वरूप परिज्ञात
हो गया ह । मुझे तुम्हारी प्राप्ति हो गई है, तुमको मैंने ग्रहण कर लिया है, तुम मोहशून्य हो गये हो,
तुमको नमस्कार हे