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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verse 35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 36, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

आत्मन्पुष्प इवामोदो भस्त्रापिण्ड इवानिलः । तिले तैलमिवास्मिंस्त्वं सर्वत्र वपुषि स्थितः ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे आत्मन्‌, फूलों में सुगन्ध की तरह, धौंकनी में वायु की तरह तथा तिलों में तेल की तरह इस शरीर में सब जगह आप ही सार रूप हैं