Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verse 72
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 36, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 72
संस्कृत श्लोक
क्षणमप्यस्थिरं वस्तु कथं कार्यकरं भवेत् ।
तरङ्गैरुत्पलाकारैर्माला कथमवेक्ष्यते ॥ ७२ ॥
हिन्दी अर्थ
मिथ्याभूत वस्तुओं की क्षणस्थायिता भी नहीं घट सकती, ऐसी अवस्था में उन्हें अर्थक्रियाकारी
कहना महाआश्चर्य हैं, ऐसा कहते हैं।
क्षणभर भी स्थिर न रहनेवाली वस्तु कैसे अर्थक्रियाकारी हो सकती है ? कमलबुद्धि से कल्पित
आकारवाले तरंगों से माला कैसे देखी जाती है ?