Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 37, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 37, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
हिरण्यकशिपौ क्षीणे समाधौ तत्सुते स्थिते ।
न बभूवापरः कश्चिद्राजा दनुसुतालये ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
हिरण्यकशिपु के मर जाने और उसके पुत्र
प्रह्लाद के समाधिस्थ होने पर पाताल में कोई दूसरा राजा न रहा