Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verses 1–2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 38, verses 1–2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 1,2

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच अथाखिलजगज्जालक्रमपालनदेवनः । क्षीरोदनगरे शेषशय्यासनगतो हरिः ॥ १ ॥ प्रावृण्निद्राव्युपरमे देवार्थमरिसूदनः । धिया विलोकयामास कदाचिज्जागतीं गतिम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

अड़तीसवाँ सर्ग जगत्‌ की व्यवस्था की सिद्धि के हेतु दैत्यकुल के रक्षार्थ प्रह्नाद के प्रबोधन के लिए हरि की चिन्ता का वर्णन | श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, तदनन्तर क्षीरसागररूपी नगर में शेष शय्यारूप सिंहासन पर बैठे हुए अरिमर्दन भगवान्‌ हरि ने, समस्त जगतो के नियमों का पालन ही जिनकी क्रीडा है, वर्षा ऋतु की निद्रा टूटने पर देवताओं के प्रयोजन को सिद्ध करने के लिए किसी समय अपनी बुद्धि से तीनों लोकों की तात्कालिक स्थिति का निरीक्षण किया