Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 38, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
क्रियास्वथोपशान्तासु भूर्लोकोऽस्तमुपैष्यति ।
असंसारप्रसङ्गोऽथ तस्य नाशे भविष्यति ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
यज्ञ आदि क्रियाओं के उच्छिन्न होने पर कर्मभूमि व्यर्थ हो जायेगी और कर्म के व्यर्थ होने पर
संसार का उच्छेद हो जायेगा