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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 38, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

आकल्पान्तं त्रिभुवनं यदिदं कल्पितं मया । नाशमेष्यत्यकालेन तापे हिमकणो यथा ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

कर्म का उच्छेद हो, इससे आपकी क्या क्षति होगी ? ऐसा कोई कहे, तो इस पर कहते हैं। प्रलयपर्यन्त रहनेवाले तीनों भुवन, जिनका मैंने निर्माण किया है, अकाल में ही जैसे धूप में हिमकण नष्ट हो जाता है वैसे ही नाश को प्राप्त हो जायेंगे