Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 38, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
तस्मात्तमेव गत्वा तु दैत्येन्द्रं बोधयाम्यहम् ।
गर्जन्गिरिनदीसुप्तं मयूरमिव वारिदः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए जैसे गर्ज रहा मेघ पर्वत नदी के तट पर सोय हुए मयूर को जगाता है वैसे ही पाताल
में जाकर दैत्यराज प्रह्लाद को ही जगाता हूँ