Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 38, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
एवं हि नियतिर्देवी निश्चिता पारमेश्वरी ।
प्रह्लादेन यथाकल्पं स्थातव्यमिह देहिना ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
देहधारी
प्रह्लाद को कल्प पर्यन्त यहीं रहना होगा, इस प्रकार की परमेश्वर की नियति दैवी नियम से निश्चित
है