Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 38, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
सर्गक्षयोदयावेतौ सुसमौ मम यद्यपि ।
तथापीदं यथासंस्थं भवत्वन्येन किं मम ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि स्रष्टव्य जगत् के सृष्टि ओर संहार ये दोनों मेरे लिए
समान ही हैं तथापि यह पूर्वोक्त सृष्टि के अनुसार हो अन्य से मेरा क्या मतलब है