Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
प्राणेषु रन्ध्रनवके प्रवृत्तेष्वथ तस्य चित् ।
चेत्योन्मुखी बभूवान्तः प्राणदर्पणबिम्बिता ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर इन्द्रियों के नौ छिद्रों
में प्रवृत्त होने पर उसकी चेतनाशक्ति लिंगदेह रूपी दर्पण में प्रतिबिम्बित होकर विषयोन्मुख हो गई