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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

अस्मिन्नवसरे यावद्बुध्यस्वेत्यवदद्विभुः । प्रबुद्धस्तावदेषोऽभूद्बर्ही घनरवादिव ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

इस बीच में जैसे ही भगवान्‌ श्रीहरि ने "जागो, यह कहा वैसे ही मेघ के गर्जन से मयूर के समान वह प्रबुद्ध हो गया