Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
तन्वां कल्पान्तशीर्णायां स्वे महिम्नि त्वयानघ ।
वस्तव्यं स्फुटिते कुम्भे कुम्भाकाशेन खे यथा ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे निष्पाप, जैसे घडे के फूटने पर घटाकाश महाकाश में समा
जाता है वैसे ही इस शरीर के कल्पान्त में विनष्ट होने पर तुम्हे आत्मभूत निरतिशय महत्ता में निवास
करना होगा