Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्तेन भवता राज्य एवेह तिष्ठता ।
क्षेपणीया गतोद्वेगमाकल्पान्तमियं तनुः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
यहाँ पर राज्य
सिंहासन पर ही स्थित हो रहे जीवन्मुक्तरूप तुमको कल्पतक इस शरीर को बिना किरी उद्वेग के
व्यवहार में प्रेरित करना चाहिए