Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
यस्य स्वदेहविपिनमाधिव्याधिदवाग्नयः ।
दहन्ति लोलाङ्गलतं मरणं तस्य राजते ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
आधिव्याधिरूपी वनाग्नियाँ
जिसके चंचल अंगरूपी लतावाले स्वदेहरूपी वन को जलाती हैं, उसका मरना उचित है