Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
यस्य नाहंकृतो भावो बुद्धिर्यस्य न लिप्यते ।
यः समः सर्वभावेषु जीवितं तस्य राजते ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
एक देह में अभिमान होने पर उसका त्याग मरण है, जिसका किसी देह में अहंभाव नहीं है और जिसकी
बुद्धि देह के प्रिय ओर अप्रिय से लिप्त नहीं होती वह सब भावोमे (देहो में) और विषयों में सम है उसके
मरण का संभव न होने से सदा उसका जीवन ही शोभित होता है