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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

योऽन्तःशीतलया बुद्ध्या रागद्वेषविमुक्तया । साक्षिवत्पश्यतीदं हि जीवितं तस्य राजते ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

जो रागद्वेष से रहित अन्तःशीतल बुद्धि से साक्षी के समान इस जगत्‌ को देखता है, उसका जीवन शोभा देता है