Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
सत्यां दृष्टिमवष्टभ्य लीलयेयं जगत्क्रिया ।
क्रियतेऽवासनं येन जीवितं तस्य राजते ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
जो सत्य दृष्टि का अवलम्बन करके इस जगत्-व्यवहार को बिना वासना
के लीला से करता है, उसका जीवन शोभा देता है