Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
नान्तस्तुष्यति नोद्वेगमेति यो विहरन्नपि ।
हेयोपादेयसंप्राप्तौ जीवितं तस्य शोभते ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
जो लोकव्यवहार करता हुआ भी दुःखहेतु
पदार्थ की प्राप्ति होने पर न तो उद्वेग को प्राप्त होता है और न सुखहेतु वस्तु की प्राप्ति होने पर मन में
प्रसन्न होता है, उसका जीवन शोभा देता है