Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
यस्मिन्श्रुतिपथं प्राप्ते दृष्टे स्मृतिमुपागते ।
आनन्दं यान्ति भूतानि जीवितं तस्य शोभते ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसके गुण आदि के श्रवणगोचर होने पर, दर्शन होने पर और स्मरण होने पर प्राणियों को बड़ा आनन्द
होता है, उसका जीवन सफल है