Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 4, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 4, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अपूर्वाह्लाददायिन्य उच्चैस्तरपदाश्रयाः ।
अतिमोहापहारिण्यः सूक्तयो हि महीयसाम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
अब चन्द्रमा की किरणों से भी महात्माओं की उपदेशवाणियाँ उत्कृष्ट हैं, ऐसा कहते हैँ ।
मनुष्य के आनन्द से लेकर हिरण्यगर्भ के आनन्दपर्यन्त विषयसुखों से भी अत्यन्त ऊँचे पद से
संबन्ध रखनेवाली जो महात्माओं की सूक्तियाँ हैं, वे अपूर्वं आनन्द को देनेवाली और मोह को सर्वथा
दूर करनेवाली हैं