Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 4, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 4, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
आत्मरत्नावलोकैकदीपिका सरसात्मिका ।
यमाद्युक्तिलतोदेति स वन्द्यः सुजनद्रुमः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मरूप रत्न के प्रकाशन में एकमात्र दीपकरूप तथा सरस युक्तिरूपी
लताएँ जिससे उदित होती है, वह सज्जनरूपी वृक्ष वन्दनीय है