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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 4, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 4, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

दुरीहितं दुर्विहितं सर्व सज्जनसूक्तयः । प्रमार्जयन्ति शीतांशोस्तमःकाण्डमिवाङ्घ्रयः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे चन्द्रमा की किरणें अन्धकारराशि को हटा देती हैं वैसे ही सज्जनों की सूक्तियाँ मन से जो बुरा विचार किया, शरीर से जो बुरा काम किया, उन सबको निवृत्त कर देती हैं