Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 40, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
न रमन्ते हि रम्येषु स्वात्मन्येव गताशयाः ।
नोद्विजन्तेऽन्यदुःखेषु स्वात्मन्येकरसायनाः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जिनका चित्त स्वात्मा में ही संलग्न है ऐसे ज्ञानी पुरुष, रमणीय अनात्म पदार्थो में सुख का अनुभव नहीं
करते ओर केवल स्वात्मा में ही जिन्हें रसायन के समान मधुर सुख का आस्वाद होता है, वे आत्मा का
स्पर्श न करनेवाले दुःखों के उपस्थित होने पर उद्विग्न नहीं होते