Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 40, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
देहसंस्थोऽप्यदेहत्वाददेहोऽसि विदेहदृक् ।
व्योमसंस्थोऽप्यसक्तत्वादव्योमेव हि मारुतः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आकाश में
स्थित भी वायु संगरहित (संबन्ध शून्य) होने के कारण आकाश शून्य होता है ऐसे ही देह दृष्टि शून्य
तुम भी देह में स्थित होते हुए भी देहरहित होने के कारण अदेह हो