Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 41, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
इदं त्याज्यमिदं ग्राह्यमिति मिथ्या मनोभ्रमः ।
नोन्मत्ततां नयत्यन्तर्ज्ञमज्ञमिव दुर्धियः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
संसार के त्याग के लिए अथवा मोक्ष की प्राप्ति के लिए तुमने समाधि ली होगी, ऐसा यदि कहें, तो
उस पर कहते हैं।
यह त्याज्य हैं और यह ग्राह्य है इस प्रकार का दुर्बुद्धियों का मिथ्या मनोभ्रम अज्ञानी की तरह ज्ञानी
को उन्मत्त नहीं बनाता