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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 41, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

सर्वस्मिन्नात्मनि तते त्वयि तामरसेक्षण । हेयोपादेयपक्षस्था द्वितीया कलना कुतः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे कमलनयन, सब में आत्मरूप आपके व्याप्त होने पर हेयोपादेय पक्ष में स्थित दूसरी कल्पना कहाँ से हो सकती है ?