Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 41, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
त्वमयं पुण्डरीकाक्षः पूज्यस्तावज्जगत्त्रये ।
तन्मत्तः प्रकृतिप्राप्तां पूजामादातुमर्हसि ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आपके द्वारा आज्ञप्त राज्य को, जो मुझे स्वभावतः प्राप्त है, मैं स्वीकार करता हूँ वैसे ही आप
भी मेरे द्वारा की गई पूजा को, जो सर्वेश्वर होने के कारण आपको नियमतः प्राप्त है, ग्रहण कीजिये,
ऐसा कहते हैं।
ये आप पुण्डरीकाक्ष हैं, तीनों जगतो में पूज्य हैं, इसलिए मुझसे शास्त्र और लोकप्रसिद्धि से प्राप्त
पूजा को आप ग्रहण कीजिये