Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 41, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
इत्युक्त्वा दानवाधीशः पुरः क्षीरोदशायिनः ।
शैलेन्द्र इव पूर्णेन्दुमर्घपात्रमुपाददे ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा कहकर दानवराज प्रह्लाद ने क्षीरोदशायी भगवान् के आगे
शैलराज जैसे पूर्ण चन्द्रमा को उपस्थित करता है वैसे ही अर्घपात्र उपस्थित किया