Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 41, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवानुवाच ।
यावन्मेरुर्धरा यावद्यावच्चन्द्रार्कमण्डले ।
अखण्डितगुणश्लाघी तावद्राजा भवानघ ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
सुर ओर
असुरो से स्तूयमान भगवान् श्रीहरि ने राज्य में अभिषिक्त, सुर ओर असुरो से प्रह्नाद से यह कहा ॥ ३ ०॥
हे अनघ, तुम जब तक पृथिवी ओर जब तक चन्द्र सूर्य मण्डल हैं तब तक अखण्डित गुणों से प्रशंसनीय
राजा होओ