Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verses 39–40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 41, verses 39–40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 39,40
संस्कृत श्लोक
अद्यप्रभृत्यसंप्राप्तदानवामरसंगरम् ।
निर्मन्दराम्भोनिधिवज्जगत्स्वस्थमिव स्थितम् ॥ ३९ ॥
देवासुरकुटुम्बिन्यो भर्तृष्वन्तःपुरेषु च ।
स्वेष्वेव यान्तु विश्वासमपरस्परमाहृताः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
आज से लेकर देव-दानवों के युद्ध से
वंचित जगत् स्पन्दरहित सागर के समान स्वस्थ-सा हो जायेगा । देवता और असुरों की नारियाँ एक
दूसरे के पतियों से बन्दी न होकर अपने ही अन्तःपुरों और पतियों के विश्वास को प्राप्त हों