Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 41, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 41, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
भवबहुलनिशानितान्तनिद्रातिमिरमपास्य सदोदिताशयश्रीः ।
दनुसुत वनिताविलासरम्यां चिरमजितामुपभुङ्क्ष्व राज्यलक्ष्मीम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे दानव, तुम कृष्णपक्ष की रात्रियों मे गाढ़ निद्रा ओर अन्धकाररूप अज्ञानान्धकार को दूर कर सदा
उदित, स्वप्रकाश ब्रह्मात्म स्फूर्तिवाले होकर असुरो की स्त्रियों के विलासो से रमणीय तथा काम आदि
शत्रुओं से अपराभूत राज्यलक्ष्मी का चिरकाल तक उपभोग करो