Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verses 2–3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 42, verses 2–3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 2,3
संस्कृत श्लोक
प्रह्रादादिविनिर्मुक्तैः पश्चात्पुष्पाञ्जलिव्रजैः ।
पूर्यमाणो विहङ्गेशपाश्चात्याङ्गरुहोत्करैः ॥ २ ॥
क्रमात्क्षीरोदमासाद्य विसृज्य सुरवाहिनीम् ।
भोगिभोगासने तस्थौ श्वेताब्ज इव षट्पदः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रह्लाद आदि द्वारा पीछे से छोडी गई पुष्पांजलियों की राशि से, जो पक्षिराज
गरुड के पीछे के पंखों पर राशिभूत हो गई थी, आच्छन्न किये जा रहे भगवान् क्रम से क्षीरसागर में
पहुँचकर तदनन्तर सुरवृन्द को विदाकर जैसे सफेद कमल पर भ्रमर बैढता हे वैसे ही शेषशय्या पर
स्थित हुए