Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 42, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
भोगिभोगासने विष्णुः शक्रः स्वर्गे सहामरैः ।
पाताले दानवाधीश इति तस्थुर्गतज्वराः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार शेषनाग के शरीररूपी आसन पर भगवान् विष्णु, स्वर्ग में देवताओं के
साथ इन्द्र और पाताल में असुरराज प्रह्लाद तीनों ही सन्तापरहित होकर स्थित हुए