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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 42, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

एषा ते कथिता राम निःशेषमलनाशिनी । प्राह्रादी बोधसंप्राप्तिरैन्दवद्रवशीतला ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, यह अवशेष पापों को दूर करनेवाली प्रह्लाद की ज्ञानप्राप्ति मैंने आपसे कही, जो चन्द्रमा के अमृत के समान शीतल है