Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 43, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
चिरमाराधितोऽप्येष परमप्रीतिमानपि ।
नाविचारवतो ज्ञानं दातुं शक्नोति माधवः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
अन्वय से प्रदर्शित अर्थ को व्यतिरेक के दर्शन द्वारा भी दृढ़ करते हैं।
चिरकाल से आराधित भी परम प्रसन्न हुए भी ये भगवान् अविचारशील पुरुषों को ज्ञान नहीं दे
सकते