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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 43, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

कदाचिदात्मनैवात्मा स्वयं शक्त्या प्रबुध्यते । कदाचिद्विष्णुदेहेन भक्तिलभ्येन बोध्यते ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

कभी स्वात्मभूत विष्णु द्वारा ही आत्मा अपने प्रयत्न से किये गये विचार के बल से स्वयं प्रबुद्ध किया जाता है और कभी भक्तिरूप प्रयत्न से प्राप्त होनेवाले विष्णु देह द्वारा बोधित होता है